ख़ुशियों के रंग
ये वो लोग थे जिन्होंने घर से निकलते हुए, आईना देखकर ये नहीं सोचा होगा कि ‘अपने चेहरे और कपड़ों को थोड़ा और संवार लूँ, जिससे जलसे में आकर्षण का केन्द्र बनूँ।’
ये वो लोग थे जिन्होंने घर से निकलते हुए, आईना देखकर ये नहीं सोचा होगा कि ‘अपने चेहरे और कपड़ों को थोड़ा और संवार लूँ, जिससे जलसे में आकर्षण का केन्द्र बनूँ।’
डॉली परिहार तीन भागों की इस शृंखला में नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर ब्लाइंड (NAB) से जुड़ी अपनी कुछ यादों को साझा कर रही हैं। इस तीसरे व अंतिम भाग में वे NAB में मिले कुछ और दोस्तों के बारे में बता रही हैं।
सेरिब्रल पाल्सी जैसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निबटने के लिए उचित जानकारी सबसे अधिक आवाश्यक है। आइये जानें कि सेरेब्रल पॉल्सी क्या है व इसके लक्षण और कारण क्या हैं।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर को एक विकासात्मक विकलांगता माना जाता है। इस लेख में जानिये ऑटिज़्म की परिभाषा, लक्षण और इस स्थिति के कारण
डॉली परिहार तीन भागों की इस शृंखला में नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर ब्लाइंड (NAB) से जुड़ी अपनी कुछ यादों को साझा कर रही हैं। इस दूसरे भाग में वे बता रही हैं कि कैसे उनकी मुलाकात NAB के दो संगीत शिक्षकों से एक बाल दिवस कार्यक्रम में हुई।
शशि सिंह लिखती हैं कि ‘लंगड़ा आम’ का नाम विकलांगजन के प्रति असंवेदनशील है और भाषाई त्रुटि को सुधारा जाना चाहिये। उनके अनुसार आम की इस प्रजाति का नाम ‘बनारसी आम’ रखा जाना चाहिये।
संजीव शर्मा अपने इस आलेख में विकलांगता से जुड़े कुछ मिथकों के बारे में बता रहे हैं और साथ ही इन मिथकों का खंडन करते हुए इनकी वास्तविकता को भी उजागर कर रहे हैं।
डॉली परिहार तीन भागों की इस शृंखला में नेशनल एसोसिएशन फ़ॉर ब्लाइंड (NAB) से जुड़ी अपनी कुछ यादों को साझा कर रही हैं। इस पहले भाग में वे बता रही हैं कि कैसे वे NAB के सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने गईं।
क्या ‘वन डे व्हीलचेयर चैलेंज’ का कोई औचित्य है? प्रदीप सिंह द्वारा लिखित लेख के विरोध में आलोकिता के तर्क
विकलांगजन में भी प्रेम की चाह होती है, उनमें भी नार्मल लोगों की ही तरह हार्मोन्स होते हैं, इस का सबूत है विकलांग लड़कियों के पीरियड्स, अब जब कुदरत ही भेदभाव नहीं करती नार्मल और विकलांग में तो इस समाज को भी भेदभाव नहीं करना चाहिए।
मानसिक विकार के अंतर्गत आने वाली कुछ सामान्य मानसिक बीमारियों के बारे में जानकारी
अदृश्य विकलांगता की परिभाषा बताती है कि यह शारीरिक, मानसिक या तंत्रिका-सम्बन्धी ऐसी स्थिति है जिसका असर बाहर से दिखाई नहीं देता किन्तु यह प्रभावित व्यक्ति की इन्द्रियों को प्रभावित करती है व दिनचर्या की आम गतिविधियों में बाधा उत्पन्न करती है।
हम अपने देश में आस-पास के माहौल को देखें तो हम पाएँगे कि इन सभी स्रोतों से आने वाली नकारात्मकता मनोरोगियों की स्थिति पर बुरा असर डालती है। मीडिया द्वारा सकारात्मक भूमिका निभाने की बात छोड़िये — ये अक्सर समाज में फैली भ्रांतियों को बढ़ावा देकर नकारात्मक भूमिका ही निभाते हैं।
अपनी उन ज्ञान-भरी बड़ी बातों से किसी विकलांग व्यक्ति को डराते रहते हैं कि ‘बहुत जल्दी तुम्हें विकृत भविष्य-रूपी एक राक्षस मिलेगा, जिससे तुम लड़ भी नहीं पाओगे और वो तुम्हें खा जायेगा।’ बेचारा विकलांग व्यक्ति सुनहरे वर्तमान में भी उस अदृश्य राक्षस के डर से डर-डर कर जीता है।
आयरन लंग मशीन की परिभाषा, इसके प्रयोग व प्रकार, आविष्कार और पोलियो से जीवन बचाने में इस मशीन के महत्त्व इत्यादि के बारे में जानकारी