बहु-विकलांगता क्या है?
इस लेख में जानिए कि बहु-विकलांगता क्या है, इसकी परिभाषा, प्रकार और उदाहरण क्या हैं।
इस लेख में जानिए कि बहु-विकलांगता क्या है, इसकी परिभाषा, प्रकार और उदाहरण क्या हैं।
समाज में बनी रीतियों के कारण विकलांगजन को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हर व्यक्ति को अपने तरीके से अपना जीवन जीने की छूट मिलनी चाहिये। संजीव शर्मा का आलेख…
मैंने अधिकांश केसों में यही पाया कि जो विकलांग और सामान्य भाई-बहनों के बीच का जो रिश्ता बचपन में बहुत मज़बूत होता था; वह समय के साथ-साथ अचानक कमज़ोर होने लगता है। बड़े होने पर अधिकतर सामान्य भाई-बहन, विकलांग भाई-बहनों को बोझ मानने लगते हैं। वे उनकी देखभाल प्यार से समर्पित होकर नहीं बल्कि सिर पर पड़ी एक अनचाही जिम्मेदारी मानकर करते हैं।
इस आलेख में नूपुर शर्मा विकलांग बच्चों के अपने भाई-बहन के साथ सम्बंध की पड़ताल कर रही हैं। अपने ग़ैर-विकलांग भाई-बहनों से मिलने वाले स्नेह और समर्थन का विकलांग बच्चों के बचपन में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।
वर्टीकल आरक्षण (ऊर्ध्वाधर आरक्षण) और हॉरिजॉन्टल आरक्षण (क्षैतिज आरक्षण) की परिभाषा, अर्थ और लाभ
कोई भी समाज किसी एक ख़ास समुदाय के लिए इंक्लूसिव नहीं हो सकता, या तो वह हर एक ऐसे समुदाय को साथ ले कर चलने का प्रयास करेगा जो किसी भी कारण से भेदभाव या नाइंसाफी का शिकार हो रहा है या फिर वह हाशिए पर धकेल दिए गए हर समुदाय के प्रति उदासीन ही बना रहेगा।
नुपुर शर्मा हमसे साझा कर रही हैं वे शब्द जिन्होनें उनके जीवन की दिशा बदल दी। क्या आपके जीवन में भी किसी ने ऐसे कुछ शब्द कहे हैं?
सिविल सेवा या यू.पी.एस.सी. परीक्षा के संदर्भ में PwBD 1, PwBD 2, PwBD 3, PwBD 4, और PwBD 5 श्रेणियों का अर्थ समझिये।
नूपुर शर्मा अपने एक अनुभव को साझा करते हुए सामान्यजन से यह अपील कर रही हैं कि वे विकलांगजन के प्रति संवेदनशील और सहनशील बनें।
नूपुर शर्मा बता रही हैं कि विकलांगजन की कल्पनाओं की दुनिया कैसी होती है और क्यों वह दुनिया वास्तविकता में नहीं बदलती।
जानिये कि सिविल सेवा परीक्षा, जिसे आमतौर पर आई.ए.एस. की परीक्षा कहा जाता है, में विकलांगजन को कौन-सी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में स्क्राइब व अतिरिक्त समय के जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर इस आलेख में दिये गये हैं।
पार्किंसंस रोग वृद्धावस्था में विकलांगता उत्पन्न होने का एक बड़ा कारण है। संजीव शर्मा इस रोग के लक्षण, निदान, उपचार और मैनेजमेंट के बारे में बता रहे हैं।
देश व दुनिया के पहले मूक-बधिर क्रिकेटर जिन्हें बाबा सिद्धाये और पैंथर के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बाबा सिद्धाये इकबाल (2005) फ़िल्म के पीछे की प्रेरणा हैं।
कुछ ऐसे व्यवहारिक तरीके जिनसे हमारे मन में सकारात्मकता आती है और हमें आगे बढ़ने, निराशा से उबरने और जीवन में रचनात्मकता लाने में मदद मिलती है।